एमसीडी के चुनाव में राजधानी के लोगों कीदिलचस्पी काफी कम है। दिल्ली के 97 प्रतिशत हिस्से कारखरखाव और विकास कार्य की जिम्मेदारी नगर निगम केपास है , इसके बावजूद लोग निगम चुनाव में वोट देने मेंकोताही बरतते है। स्टेट इलेक्शन कमिशन इस बार प्रयासकरेगा कि लोगों में वोटिंग को लेकर दिलचस्पी बढ़े। इसकेलिए कई उपाय किए जाएंगे।
आंकड़ों के अनुसार , निगम चुनाव को लेकर राजधानी केलोगों का रुझान खासा लापरवाही वाला है। लोग विधानसभाचुनाव में तो कुछ दिलचस्पी दिखाते हैं लेकिन निगम चुनावमें ' तटस्थ ' हो जाते हैं। पिछले निगम चुनावों की बात करेंतो सन् 1997 में हुए चुनाव में 41 प्रतिशत लोगों ने वोटडाले थे। सन् 2002 में यह बढ़कर 52 प्रतिशत हो गया ,लेकिन पिछले निगम चुनाव (2007) में यह फिर से घटकर42 प्रतिशत पर आ गया। खास बात यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव ( सन् 2008) में दिल्ली के लोगों नेअच्छी दिलचस्पी दिखाई थी। उस वक्त करीब 57 प्रतिशत लोगों ने वोट दिया था।
लेकिन निगम चुनाव में लोगों के कम वोट देने से स्टेट इलेक्शन कमिशन निराश है। आयोग का मानना है कि निगमचुनाव मंे लोगों को ज्यादा दिलचस्पी दिखानी चाहिए , क्योंकि राजधानी के रखरखाव और अन्य जिम्मेदारीनिगम पार्षदों के ही पास है। कमिशन का मानना है कि निगम चुनाव में लोगों की दिलचस्पी कम होने का परिणामयह होता है कि ऐसे लोग भी चुनकर आ जाते हैंं , जो स्थानीय नहीं होते और बाद में वह अपने इलाके के विकासकार्यों में कम दिलचस्पी दिखाते हैं। अब अप्रैल में होने वाले निगम चुनाव में लोगों का रुझान बढ़ाने के लिएकमिशन कई कदम उठाने जा रहा है।
इलेक्शन कमिश्नर राकेश मेहता के अनुसार पिछले माह उन्होंने चंडीगढ़ नगर निगम का चुनाव कराया था , जिसमेंलोगों ने करीब 60 प्रतिशत मतदान किया। उससे पिछले निगम चुनाव में वोटिंग प्रतिशत मात्र 40 था। वोटिंगप्रतिशत इसलिए बढ़ा क्योंकि चुनाव से पहले वहां वोटिंग को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें बच्चोंकी मैराथन , सेमिनार , एफएम पर जिंगल और विज्ञापन आदि पर खासा ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि अबदिल्ली में भी यही रणनीति अपनाई जाएगी और लोगों का चुनाव के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए इसी प्रकार केकार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने बताया कि 1 फरवरी को वह मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कररहे हैं। वहां रणनीति फ्रेम की जाएगी और मतदान तक उसे पूरी दिल्ली में फैलाया जाएगा
|